0 comments Tuesday, February 26, 2008

फिर किसी दिन
मेरी, ये कविता पूरी होगी
मिलने पर कुछ छंदों के
नहीं अधूरी होगी
हाँ! पर फिर किसी दिन......

फिर किसी दिन
इसमें, अपनों की ही बाते होंगी
जाने कितनी मुद्दत के बाद
शब्दों की बरसाते होंगी
हाँ! पर फिर किसी दिन....

फिर किसी दिन
देखो, कोरा कागज़ त्यौहार मनायेगा
होली के रंग की बात नहीं
श्याम रंग तो पायेगा
हाँ! पर फिर किसी दिन....

फिर किसी दिन
चौखट पर, हलकी सी धुप बिखरेगी
बन के गीत मेरी ये कविता
फिर होंठों पर निखरेगी
हाँ! पर फिर किसी दिन....

फिर किसी दिन
तुम भी, यूँ ही गुन्गुनायोगे
लेकिन गीत मेरा ही मुझे सुनने को
शायद तरस जायोगे
हाँ! पर फिर किसी दिन....

0 comments Tuesday, February 12, 2008

एक खाली ख़त नाम था आया
ये समझाने को
शब्दों की ज़रूरत नहीं है
प्यार जतलाने को
एक खाली ख़त नाम था आया.........

यू रुसवा रुसवा तुम न बैठो
दिल की बाते दिल में रखो
आएगा फाल्गुन फिर से
प्रीत जताने को
एक खाली ख़त नाम था आया....

एक कहावत बड़ी पुरानी
रमता जोगी, बहता पानी
तू पानी बन साथ मेरे संग
प्यास जगाने को
एक खाली ख़त नाम था आया....

जब सरसों पीला रंग पाये
बेला मिलन की महकती आये
बहुत से फूल होंगे बगिया में
फिर मुस्काने को
एक खाली ख़त नाम था आया....

मैं खाली ख़त सीने से ला के
चंचल मन में राज़ छुपा के
इतराती फिरती रहती हूँ
झलक सी पाने को
एक खाली ख़त नाम था आया....

0 comments Tuesday, February 5, 2008

एक नज़र जो खुद पर डाली
प्रेम के रंग में डूबा पाया
हर कोई कैसे चाहे मुझसे
संबंधो की झूठी काया

मुझमे जो है, तुम क्या जानो
गूंगे हृदय को न पहचानो
मैं गुंजन हूँ उस भवरे की
डाल डाल पर जो भरमाया

समय बड़ी अजीब चीज है
रिश्ते भी मुरझाते है
कहने वाले फिर भी पूछे
बता! कौन है तेरा सरमाया

बुझते मन से कैसे बोलूं
मैं निशा की जोत रूहानी
निरंतर जलती रहती हूँ अंदर
औरो को मिलता उजियारा!!!!!!

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अलसाये से नैन जब
नज़र उठा के तुम्हे देखे
बसंत के फूल तब
तन मन में खिलते देखे
मेरे बिस्तर पर
धूल छनी जब धुप आयी
रंग सात अनजाने से
मैंने चेहरे पर देखे
तेरे जाने से पहले
जो अश्रु गाल पर आये
मैंने विश्वास भरे हाथ
खुद ही उलटते देखे
रोज़ दिन आज कल
ढलता है देरी से
रोशनी की मर्यादा में लेकिन
सपनो के उत्साह देखे
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