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Friday, January 18, 2008
जिस मोड़ से शुरू किया था, हमने वो सफ़र
खनक सदा गूंजेगी उसकी बनके गंगा जल
एक महकती बेला प्यार की, योवन के जब द्वार चदे
फूल छिटक कुछ संकोचो के, बाजूबंद की शान बने
लेकिन याचक बन ने से पहले, बंद हुए ये अधर
खनक सदा गूंजेगी उसकी बनके गंगा जल
प्रेम पपीहा आँगन में मेरे, मनमीत तुझे बुलाये
वो शब्द वादियों से टकराकर, स्वर मधुर कर जाए
लेकिन रोये साथ बैठ कर, आये ऐसे भी पल
खनक सदा गूंजेगी उसकी बनके गंगा जल
जो कांटे है राहों मैं तेरी, कैसे अब चुग पायू
तुने बदला रास्ता अपना, कैसे पलक छाया लायू
तू आएगा फिर से मुड़कर, इन गीतों मैं कल
खनक सदा गूंजेगी उसकी बनके गंगा जल
जिस मोड़ से शुरू किया था, हमने वो सफ़र
खनक सदा गूंजेगी उसकी बनके गंगा जल ............
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