Thursday, May 29, 2008

अक्स तेरा दिखता है मेरी आखो मे
सर उठा के हमने कभी आईना नही देखा
वो ढ़ूढ़ंते है हुम में खुशी के दो पल
हम कुर्बान करने को है मुस्कुराहटे अपनी...

1 comments:

DR.ANURAG ARYA said...

aor ravaangi laiye khayaalo me....

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