क्या तुम्हे भी प्रेम रंग भाता होगा??
वो भी बैठा बैठा मुस्कुराता होगा
यादो को बातो से सहलाता होगा
जब सो जाती होगी सारी दुनिया
चुपके से स्वपन जलाता होगा
क्या तुम्हे भी प्रेम रंग भाता होगा?
जुदाई का अब भय खाता होगा
खुद में ही गुनगुनाता होगा
तस्वीर देखने को होकर व्याकुल
नैन भी न झपकाता होगा
क्या तुम्हे भी प्रेम रंग भाता होगा?
सांझ ढले घर आता होगा
यारो से घबराता होगा
कलम चाहे न उठा पाता हो
गीतों का रस मनाता होगा
क्या तुम्हे भी प्रेम रंग भाता होगा?
Wednesday, March 12, 2008
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2 comments:
having good flight of ieads,try to compile ,try to interconnect the ideas ,good luck for u
वो भी बैठा बैठा मुस्कुराता होगा
यादो को बातो से सहलाता होगा
जब सो जाती होगी सारी दुनिया
चुपके से स्वपन जलाता होगा
क्या तुम्हे भी प्रेम रंग भाता होगा?
जुदाई का अब भय खाता होगा
खुद में ही गुनगुनाता होगा
तस्वीर देखने को होकर व्याकुल
नैन भी न झपकाता होगा
क्या तुम्हे भी प्रेम रंग भाता होगा?
सांझ ढले घर आता होगा
यारो से घबराता होगा
कलम चाहे न उठा पाता हो
गीतों का रस मनाता होगा
क्या तुम्हे भी प्रेम रंग भाता होगा?
Soooooooooooooo Romantic
kaafi khushmizaz lagti hai aap.
keep it up
take care
bye
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