Tuesday, February 5, 2008

अलसाये से नैन जब
नज़र उठा के तुम्हे देखे
बसंत के फूल तब
तन मन में खिलते देखे
मेरे बिस्तर पर
धूल छनी जब धुप आयी
रंग सात अनजाने से
मैंने चेहरे पर देखे
तेरे जाने से पहले
जो अश्रु गाल पर आये
मैंने विश्वास भरे हाथ
खुद ही उलटते देखे
रोज़ दिन आज कल
ढलता है देरी से
रोशनी की मर्यादा में लेकिन
सपनो के उत्साह देखे
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