कितने रिश्ते पहचान देते हमको, खुद के अस्तित्व के मायने रखते है
चंद ख्वाहिशे दामन में लेकर, जिंदगी भर फिर रिश्ते सुलझाते है
जो रंजिशे दिलों में है बाकी , बातो के तीर चलाते है
सम्मान नहीं कर सकते किसी का, और आँगन में तुलसी लगाते है
Friday, January 18, 2008
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