Tuesday, October 9, 2007


एक तैयारी, एक सवारी
एक समंदर पार हुआ है..
अब न घबरा मन तू मेरे
ज़िन्दगी का आज आभास हुआ है..


एक जवानी, एक कहानी
एक इन्सान किरदार हुआ है
तू जो कह देता था हसकर
तुझसे घर आबाद हुआ है.....


एक तमन्ना, एक नसीब
सपनों का आगाज हुआ है
बन्द करके बैठी जो आंखे
हर अपना नाराज़ हुआ है..........


एक तन्हायी, एक पुरवाई
फ़िर मौसम का साथ हुआ है
झुक जयेगी हर वो मुश्किल
साजन जो तेरे पास हुआ है........

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