ए भारती
आज फिर से सलाम करने का
वक्त आया है...
कुछ समर्पित करने को
देश भक्त आया है......
हम उबाल क्या लाये लहू में
जंग भी तो नहीं लड़नी
लेकिन दिलों की डोर जो बाधें
वो पतंग लाया है।।
ए भारती.................
लुटने को श्रृंगार नहीं
अब युद्ध के मैदान में
नवजीवन का गीतों में
वो प्रसंग आया है॥
ए भारती.................
हम साठ साल अजादी के
यूं ना गवाऎगें
देखो माँ ये सन्त
आज सन्कल्प लाया है॥
ए भारती...............
उठो, बढ़ो, नफ़रत करने वालों
कि देश अभी मरा नही॥
प्यार की मशाल लेकर
हर शख्स आया है॥
ए भारती...............
Monday, August 13, 2007
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2 comments:
आपकी लिखनी दिल को छूती है ! वास्तव मे कुछ कहने के लिये शब्द नही है ! आप से बहुत कुछ सीखने को मिला और शायद आगे भी ऐसे ही मिलता रहेगा ! ब्लोग का नाम भी उतना ही खूबसूरत है जितनी आपकी लेखनी ! ऐसे ही लिखती रहिये ! और हमे अच्छा पढने को मिलता रहेगा ! धन्यवाद !
दीपक
Siraf itna hee keh saktey hain iss lekhan key liye "Ati Uttam!"
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