Sunday, June 10, 2007


रधिका पास आकर बोली...
आज फ़िर से उल्झन मे हूँ स्वामी
कहा आज फिर किसी ने
कोई और है कृष्ण की पटरानी..
क्युं भ्रम मे हो कि कृष्ण तुम्हारा है
रास रचाये गोपियो संग
ग्वालों का प्यारा है
आज प्रीत की पूछ नहीं
ये सब केहते हैं
व्यथित मन के देख सवाल
कृष्ण मुस्कुराते हैं..
बोली राधा
सुनो प्रिये..
तुम यूं ना मुस्कुराओ
मेरे अनुत्तरित प्रेश्नो का
कुछ समाधान बतायो
कहा कृष्ण ने "हे राधे"
सुनो ध्यान से जो कह्ता हूँ.
राधे शब्द का आज अर्थ बतलाता हूँ..
रुक्मनि, सत्याभामा है मुझ्को प्यारी
लेकिन राधे शब्द के आगे हर कोई हारी...
" बिना राधे. श्याम आधे"
ये मूल मंत्र जीवन का
अगर समझ लो तुम इसको
तो कृष्ण तु्म्हारा है..
नहीं लेगा कोई नाम मेरा
बिना तुम्हे याद किये
तुम आरम्भ हो कृष्ण का
अन्त भी कृष्ण तुम्हारा है....

1 comments:

Shina said...

Dear Shruti,

You are simply amazing! I have no doubt about it ...tell me one thing where did you get the depth of language ...shruti dear, honestly you have got an amazing talent .. I hope i can think little bit like you ....

-S

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